Friday, April 1, 2011

धार्मिक पर्यटन का पथ गोडवाड़

गोडवाड महोत्सव के अवसर पर विशेष

गोडवाड़ धार्मिक पर्यटन का मार्ग प्रदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा हैं क्योकि यहां अनेक धार्मिक स्थान, ऐतिहासिक स्मारक एवं धार्मिक सांस्कृति कार्यक्रम सिलसिला चलता रहता है। गोडवाड़ धार्मिक पर्यटन का खजाना है। यह सात जिलों में घिरे होने के साथ यहा गुजरात की धार्मिक संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है। गोडवाड कला एवं लोक संस्कृति की दृष्टि से समृद्ध है। यहां तीज त्यौहार व विवाहोत्सव आदि धार्मिक अवसरों पर महिलाऐं गीत गाती है तथा विभिन्न सांस्कृतिक मण्डलों द्वारा धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक5म आयोजित किये जाते हैं जो धार्मिक पर्यटन को बढावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे है। यहां दशहरा, दीपावली, होली, रक्षा बन्धन, गणेश चतुर्थी, शिवरात्रि, जन्माष्टमी, शीतला सप्तमी, तीज, ईद, मोहरम, महावीर जयन्ती आदि विभिन्न धर्मावलम्बियों द्वारा पर्व एवं त्यौहार मनाया जाते हैं जो हमारे धार्मिक पर्यटन को बढावा देने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
धार्मिक पर्यटन को बढावा देने में धार्मिक स्थानों और सांस्कृति कार्यक्रम की अहम् भूमिका होती है। धार्मिक पर्यटन स्थानों पर धर्मानुसार धार्मिक कार्यक5म आयोजित किये जाते हैं जिससे लोगों का जुड़ाव होना स्वाभाविक है जिससे पर्यटन को बढावा मिलता है। रामदेव जी का मेला बिराटिया खुर्द गांव में प्रति वर्ष भादवा शुक्ला एकादशी को भरता है जो दो दिन चलता है। इसमें प्रतिवर्ष एक लाख से अधिक महिला पुरूष पर्यटक बाबा रामदेव के पांच मंजिले मन्दिर के दर्शन करते हैं। यहां रात्रि में भजन संध्या का कार्यक्रम होता हैं तथा द्वादशी को विशाल ध्वजा चढ़ाते हैं।
परशुराम महादवे मेला के अवसर पर भारी संख्या में धार्मिक पर्यटक आते हैंै। यहां परशुराम जयन्ती श्रावण शुक्ला षष्ठमी व सप्तमी पर भारी मेला भरता है। जिसमें एक माह पूर्व से ही धार्मिक पर्यटक एवं श्रद्धालु पैदल चल कर आते है। यहां धार्मिक पर्यटन को बढावा देने में परशुराम कुण्ड स्थान पर एवं अमरगंगा ट्रस्ट द्वारा आयोजित रात्रि भजन संध्या देशी विदेशी पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है। यहां धार्मिक पर्यटकोंं का पूरे सावन माह विशेषकर सोमवार को मेला लगा रहता है। सावन माह में छ: सात लाख से ज्यादा धार्मिक पर्यटक परशुराम के दर्शनार्थ पंहुचते हैं।
गोडवाड़ क्षेत्र में शिवरात्रि के अवसर पर गांव-गांव में मेले का भजन संन्ध्या का कार्यक्रम किये जाते है जो देशी विदेशी धार्मिक पर्यटकों को जोडऩे का कार्य कर रहे है। पाली के लाखोटिया महादेव मन्दिर पर राज्यस्तरीय एक शाम लाखोटिया महादेव के नाम भव्य भजन संन्ध्या आयोजित की जाती है। जिसमें हजारों देशी विदेशी धार्मिक पर्यटक आते है। इसी तरह पाली और सोजत में शीतला माता के मेले के अवसर पर अनेक गांव एवं क्षेत्रों से हजारों की संख्या में धार्मिक पर्यटक पंहुचते है। मेलों के दौरान विभिन्न जातियों के कला जत्थें और आकर्षक वेश भूषा में गैर दल भाग लेते है जो अपने दल का नृत्य प्रदर्शन करते है जो धार्मिक पर्यटकों का मुख्य आकर्षण होता हैं।
गोडवाड़ में दशहरा मेला, पाली, बाली, रानी, सुमेरपुर के साथ अन्य कई स्थानों पर धूमधाम से मनाया जाता हैं इस अवसर पर रावण दहन एवं आतिशबाजी की जाती हैं। वरकाना मेले में जैन धर्मावलिम्बयों का मेला इस तीर्थ स्थान पर प्रतिवर्ष पोष सुदी दशम को भरता हैं जहां हजारों की संख्या में धार्मिक पर्यटक आते है। चोटीला पीर दूलेशाह का मेला धार्मिक पर्यटन के साथ साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है यहां सभी धर्मो के धार्मिक पर्यटक आते है। गोरिया गणगोर मेला आम धार्मिक पर्यटकों से दूर है लेकिन आदिवासियों यह मेला सबसे बड़ा पर्यटन तीर्थ स्थल है। यही उनका प्रमुख सामाजिक पारिवारिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थान हैं जो धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में गोंडवाड़ की पहचान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे है।
पाली के सोमनाथ मन्दिर पर रोजाना देशी विदेशी धार्मिक पर्यटकों का आने जाने का तांता लगा रहता हैं। यह मन्दिर पाली शहर के बीचों बीच होने के कारण देशी विदेशी पर्यटकों का मुख्य आकर्षण का केन्द्र है। इसके साथ गोडवाड़ के राता महावीर, मुछाला महावीर, फालना का स्वर्ण मन्दिर, मानपुरा भांकरी, लाखोटिया महादेव, नवलखा मन्दिर, करणी माता मन्दिर, बजरंग बाग, गणेश मन्दिर, ओम विश्व गुरूकुल दीप,शनिधाम आलावास सहित जहां के अनेक धार्मिक स्थान धार्मिक पर्यटन के केन्द्र है। निमाज का चामुण्डा माता मन्दिर पुरातात्विक महत्व का प्रमुख स्थल है। यहां की बारीक कारीगरी व दीवारों पर उत्कीर्ण मूर्तियां स्थापत्य कला की उत्कृष्टता की प्रतीक देखने को मिलती है। यहां पुरातात्विक धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के मन्दिर होने के कारण धार्मिक पर्यटन को फलीभूत करने में अहम् भूमिका निभा रहे है। जो पर्यटकों को अपनी और आकर्षित कर रहे है। धार्मिक पर्यटन के अनेक स्थान है जो पर्यटन के विकास में अपनी खास भूमिका एवं पहचान बनाये हुये है। यहां देशी विदेशी पर्यटक ज्यादातर इन धार्मिक पर्यटन स्थलों पर आते है जो यहां की विभिन्नता भरी संस्कृति को देखकर अभिभूत होते हैं। यहां ऐसा लगता है मानों गोडवाड़ धार्मिक पर्यटन का खजाना हो जो इस क्षेत्र के लिये अद्भूत सौगात हैं

बेहद आकर्षक होगा गोडवाड़ महोत्सव

सादड़ी। राणकपुर तीर्थ के सूर्य मंदिर लोक देवता सोनाणा खेतलाजी मंदिर पर जिला प्रशासन एवं पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले गोडवाड़ महोत्सव 2011 को बेहतर बनाया जाएगा। इसके लिए मंगलवार की देर शाम जिला कलक्टर नीरज के. पवन की अध्यक्षता व गोडवाड़ महोत्सव संयोजक उपखण्ड अधिकारी मोहनसिंह राजपुरोहित, पर्यटन विभाग प्रभारी विकास पण्ड्या के सानिध्य मे बैठक हुई, जिसमे गोडवाड़ महोत्सव को पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनाने की महत्ती योजनाओं, महोत्सव इम्पू्रवमेन्ट एवं एडवेंचर टयूरिज्म को बढावा देने की महत्ती योजना अनुरूप प्रतियोगिताओं के आयोजन पर वैचारिक मथंन किया और इनके प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन करने हेतु प्रभारी अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों क ो जिम्मा सौपा गया। साथ महोत्सव इस बार तीन दिन की बजाय चार दिन में सम्पन्न करने एवं विदेशी पर्यटकों के लिए रस्सा कस्सी स्पर्धा, नौकायन, रॉक क्लाईबिंग, केमल, हार्स सफ ारी एवं वन्यजीव अभ्यारण्य में पैदल व जीप ट्रैकिंग का लुत्फ उठाने वाली आकर्षक स्पर्धाएं जोड़ी गई है। इसके अलावा भरतनाट्टयम, अग्नि नृत्य, सिद्धी धमाल के साथ रंगारंग सास्ंकृतिक संध्या के आयोजन पर चर्चा की गई। साथ ही सांरगवास स्थित आराध्य देव सोनाणा खेतलाजी मेला व्यवस्थाओं व सुरक्षा जाप्ता पर चर्चा की गई
बैठक में मेला संयोजक देसूरी उपखण्ड अधिकारी राजपुरोहित ने गत महोत्सव का बिन्दूवार महोत्सव एजेण्डा बताया।
राणकपुर व नलवाणिया बांध में लगातार तीन दिन निर्धारित समयावधि मे नौकायन, नारलाई मे रॉक क्लाईबिंग, कुम्भलगढ वन्यजीव अभ्यारण्य की राणकपुर तीर्थकंर ट्रेल में होर्स व केमल सफ ारी के अलावा राणकपुर तीर्थ से कुम्भलगढ एव कुम्भलगढ से सांरगवास सोनाणा तीर्थ तक जीप सफ ारी आयोजन कर पर्यटक लुभावनी योजना महत्वपूर्ण है जिनके सफ ल क्रियान्वयन हेतु प्रभारियों को जिम्मा दिया। इसके अलावा सूर्यमंदिर पर रंगारंग सांस्कृतिक संध्या आयोजन में इस वर्ष ओर बेहतर बनाने की योजना से केसरिया बालम की प्रस्तुति हेतु लंगा बन्धु ,भरतनाट्यम, अग्निनृत्य सिद्धी धमाल सहित शहनाई सन्तुर वादक को आमन्त्रण देने पर विचार किया गया। बैठक में देसूरी तहसीलदार जग्नेश्वर श्रीमाली, बाली पुलिस उपाधीक्षक चिंरजीलाल मीणा, देसूरी पुलिस निरीक्षक ताराचंद, ब्लाक सीएमएसओं राजेश राठौड़, पचायत समिति विकास अधिकारी घीसाराम बामणिया, एबीइइओं मोहनलाल राठौड़, सहायक अभियन्ता जलदाय विभाग केसी सिघारिया, पालिकाध्यक्ष शंकरलाल मेघवाल, सहायक अभियन्ता लोक निर्माण विभाग ललीत परिहार, सहायक अभियंता डिस्कॉम हिम्मतराम फु लवारिया, राणकपुर पेढी प्रबन्धक प्रेमराज टांक, सोनाणा खेतलाजी ट्रस्ट गणपतसिंह, पर्यटन गाइड़ हसमुख शर्मा, मुकेश शर्मा, वनविभाग वनपाल पर्वतसिंह चम्पावत, डॉ.नवीन व डॉ.परीक्षित राजपुरोहित,पेढी मैनेजर निमायचन्द जैन सहित बड़ी तादाद मे प्रशासनिक अधिकारी तथा होटल व्यवसायी उपस्थित थे।
साभार - दैनिक नवज्योति


इतिहास की स्वर्णिम इबारत लिखी हुई है गोडवाड़ में


रावली की तलहटी में इतिहास की स्वर्णिम इबारत लिखी हुई है गोडवाड़ में। तपस्वी, मनीषी से लेकर दानदाताओं और आजादी के स्वतंत्रता वीरों के विराट व्यक्तित्व को संकेत-प्रतीक में दर्शाते गोडवाड़ के कई स्थल अपनी बात सुनाते हुए लगते है। गोडवाड़ क्षेत्र के धार्मिक, पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व को जानने की लालसा में प्रसिद्ध यात्राी हवेन सांग ने सातवीं शताब्दी में कई स्थानों का भ्रमण किया था।

परशुराम गुफा-समुद5 तल से 3995 फुट की टंचाई पर अरावली की वादियों के बीच स्थित यह गुफा सादडी से 14 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। हैदयवंÓाीयों के संहार के पश्चातप परशुराम ने यहीं बैठकर तपस्या की थी।
जूना खेड़ा-चौहानों की राजधानी रहे नाडोल के इस क्षैत्र में पुरातात्विक उत्खनन से पूरी एक सभ्यता के अवशेषा प्राप्त हुए है। देसूरी तहसील स्थित इस कस्बे के भव्य शिल्प सजे देवालय तथा आशापुरा माता का मंदिर कला और श्रद्वा के केन्द्र है। बताते है कि अतीत में अतिसंवेदना रहे इस क्षैत्र को गजनी व ऐबक ने रौंदने की कोशिश की थी। इतिहासकार इस स्थल गुरू गोरखनाथ, नारद व राजा भोज से भी जोड़ते है।
हिंगलाज माता, गुडालास लार्ड विलियम वैंंिटक के समय में घणी ग्राम में हिंगलाज माता की गुफा मंदिर के आसपास पिंडारियों ने मुंह छुपाया था। जिन्हें कर्नल स्लीमैन ने पराजित किया था। शिव पूराण में वर्णित 52 शक्ति पीठों में सर्व प्रथम स्थान हिंगलाज माता का हैं। मूल स्थान पाकिस्तान में है।
जवालेश्वर महादेव जवाली स्थित इस मंदिर में साधाना रत महर्षि जाबाली ने वेदों की रचनाएं रची थी।सूर्य मंदिर भाटून्द तालाब के मुहाने पर स्थित पाण्डव कालीन सूर्य मंदिर, यहां की कलात्मक धरोहर है। बाली तहसील के इस क्षैत्र में गंधर्व सेन ने तपस्या की थी।
ढालोप-बाबा रघुनाथ पीर की धूणी के लिये सुप्रसिद्व इस स्थल पर राजस्थान, गुजरात व मालवा से तीर्थ यात्रियों का आना जाना लगा रहता है। यहां ब्रहााजी का प्राचीन मंदिर भी है।
रणकपुर-48 हजार वर्ग फीट में फैले, 2 मंजिले इस प्रस्तर नक्काशी सजे मंदिर की शिल्पकला दर्शनीय है। मघई नदी के मुहाने, मादरी पहाडी की तलहटी में 84 देव प्रतिमाओं विराजित इस मेघ मंडप अलंकृत मंदिर में 1444 खंभे पर उत्कीर्ण नक्काशी, बरबस मनमोह लेती है।
पंचतीर्थ-जैन पंचतीर्थ घाणेराव, वरकाणा, सादडी, नाडोल व नारलाई इस क्षैत्र को अद्भूत गरिमा प्रदान करते हैं । कुभा के शासनकाल में धरणीशाह द्वारा बनवाया रणकपुर मंदिर , मूंछों के चमत्कार के लिये प्रसिद्ध मुछाला महावीर घाणेराव, 11 जैन मंदिर सहित नारलाई,पदमप्रभु, नेमीनाथ, भगवान ऋ ऋषभदेव, जीरावला पाश्र्वनाथ के मंदिरों की नगरी नारलाई, पाश्र्वनाथ मंदिर व गोडवाड जैन महासभा मुख्यालय की नगरी वरकाणा इस तपोभूमि की श्रद्वा में ही वृद्वि करते है। सेवाड़ी, राता महावीर जी-बीजापुर बेडा नाणा, खुडाला, खीमेल, सांडेराव, जाखोड़ा आदि के मदिरों का शिल्प भी खासा मोहक है।
बाली दुर्ग-राजपुताने के इतिहास की धरोहर ने स्वतंत्रता संग्राम के कई नायकों को शरण दी है। आर.डी.गट्टानी को यहां काफी समय के लिये रखा गया था।
मुछाला महावीर-घाणेराव के निकट स्थित मुछाला महावीर जैन तीर्थ प्राकृतिक सौन्दर्य के मध्य आया हुआ हैं। इस चमत्कारिक मन्दिर के बारे में किवंदन्ती है कि भक्त की लाज रखने के लिये भगवान महावीर की मूर्ति पर मूछें निकल आई थी तभी से इस स्थान को मुछाला महावीर के नाम से जाना जाता हैं।
वरकाणा तीर्थ-रानी से 5 किलोमीटर दूर वरकाणा गांव में काफी संख्या में जैन मन्दिर बने हुये हैं यहां वर्ष भर श्रद्वालुओं का आना जाना लगा रहता है मन्दिरों की कारीगरी अत्यन्त मन भावन हैं।
नारलाई तीर्थ-जैन तीर्थ नारलाई, रानी-देसूरी मार्ग के मध्य वरकाणा से 10 किलोमीटर की दूरी पर पहाडी पर स्थित मन्दिर यहां के सौन्दर्य को दिन दुना रात चौगुना कर देता है। गुप्त िशलाऐं व मूर्तियां यहां के मुख्य आकर्षण का केन्द्र हैं। इसके अतिरिक्त गोडवाड में फालना का स्वर्ण मन्दिर, घाणेराव कीर्तिस्तंभ, रानी का सांई धाम मन्दिर, सादडी का मुक्ति धाम, नाडोल आशापुरा माता मन्दिर तथा मुण्डारा चामुण्डा माता मन्दिर भी देशी एवं विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बन रहे हैं।

धार्मिक पर्यटन का पथ गोडवाड़

गोडवाड महोत्सव के अवसर पर विशेष

गोडवाड़ धार्मिक पर्यटन का मार्ग प्रदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा हैं क्योकि यहां अनेक धार्मिक स्थान, ऐतिहासिक स्मारक एवं धार्मिक सांस्कृति कार्यक्रम सिलसिला चलता रहता है। गोडवाड़ धार्मिक पर्यटन का खजाना है। यह सात जिलों में घिरे होने के साथ यहा गुजरात की धार्मिक संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है। गोडवाड कला एवं लोक संस्कृति की दृष्टि से समृद्ध है। यहां तीज त्यौहार व विवाहोत्सव आदि धार्मिक अवसरों पर महिलाऐं गीत गाती है तथा विभिन्न सांस्कृतिक मण्डलों द्वारा धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक5म आयोजित किये जाते हैं जो धार्मिक पर्यटन को बढावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे है। यहां दशहरा, दीपावली, होली, रक्षा बन्धन, गणेश चतुर्थी, शिवरात्रि, जन्माष्टमी, शीतला सप्तमी, तीज, ईद, मोहरम, महावीर जयन्ती आदि विभिन्न धर्मावलम्बियों द्वारा पर्व एवं त्यौहार मनाया जाते हैं जो हमारे धार्मिक पर्यटन को बढावा देने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
धार्मिक पर्यटन को बढावा देने में धार्मिक स्थानों और सांस्कृति कार्यक्रम की अहम् भूमिका होती है। धार्मिक पर्यटन स्थानों पर धर्मानुसार धार्मिक कार्यक5म आयोजित किये जाते हैं जिससे लोगों का जुड़ाव होना स्वाभाविक है जिससे पर्यटन को बढावा मिलता है। रामदेव जी का मेला बिराटिया खुर्द गांव में प्रति वर्ष भादवा शुक्ला एकादशी को भरता है जो दो दिन चलता है। इसमें प्रतिवर्ष एक लाख से अधिक महिला पुरूष पर्यटक बाबा रामदेव के पांच मंजिले मन्दिर के दर्शन करते हैं। यहां रात्रि में भजन संध्या का कार्यक्रम होता हैं तथा द्वादशी को विशाल ध्वजा चढ़ाते हैं।
परशुराम महादवे मेला के अवसर पर भारी संख्या में धार्मिक पर्यटक आते हैंै। यहां परशुराम जयन्ती श्रावण शुक्ला षष्ठमी व सप्तमी पर भारी मेला भरता है। जिसमें एक माह पूर्व से ही धार्मिक पर्यटक एवं श्रद्धालु पैदल चल कर आते है। यहां धार्मिक पर्यटन को बढावा देने में परशुराम कुण्ड स्थान पर एवं अमरगंगा ट्रस्ट द्वारा आयोजित रात्रि भजन संध्या देशी विदेशी पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है। यहां धार्मिक पर्यटकोंं का पूरे सावन माह विशेषकर सोमवार को मेला लगा रहता है। सावन माह में छ: सात लाख से ज्यादा धार्मिक पर्यटक परशुराम के दर्शनार्थ पंहुचते हैं।
गोडवाड़ क्षेत्र में शिवरात्रि के अवसर पर गांव-गांव में मेले का भजन संन्ध्या का कार्यक्रम किये जाते है जो देशी विदेशी धार्मिक पर्यटकों को जोडऩे का कार्य कर रहे है। पाली के लाखोटिया महादेव मन्दिर पर राज्यस्तरीय एक शाम लाखोटिया महादेव के नाम भव्य भजन संन्ध्या आयोजित की जाती है। जिसमें हजारों देशी विदेशी धार्मिक पर्यटक आते है। इसी तरह पाली और सोजत में शीतला माता के मेले के अवसर पर अनेक गांव एवं क्षेत्रों से हजारों की संख्या में धार्मिक पर्यटक पंहुचते है। मेलों के दौरान विभिन्न जातियों के कला जत्थें और आकर्षक वेश भूषा में गैर दल भाग लेते है जो अपने दल का नृत्य प्रदर्शन करते है जो धार्मिक पर्यटकों का मुख्य आकर्षण होता हैं।
गोडवाड़ में दशहरा मेला, पाली, बाली, रानी, सुमेरपुर के साथ अन्य कई स्थानों पर धूमधाम से मनाया जाता हैं इस अवसर पर रावण दहन एवं आतिशबाजी की जाती हैं। वरकाना मेले में जैन धर्मावलिम्बयों का मेला इस तीर्थ स्थान पर प्रतिवर्ष पोष सुदी दशम को भरता हैं जहां हजारों की संख्या में धार्मिक पर्यटक आते है। चोटीला पीर दूलेशाह का मेला धार्मिक पर्यटन के साथ साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है यहां सभी धर्मो के धार्मिक पर्यटक आते है। गोरिया गणगोर मेला आम धार्मिक पर्यटकों से दूर है लेकिन आदिवासियों यह मेला सबसे बड़ा पर्यटन तीर्थ स्थल है। यही उनका प्रमुख सामाजिक पारिवारिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थान हैं जो धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में गोंडवाड़ की पहचान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे है।
पाली के सोमनाथ मन्दिर पर रोजाना देशी विदेशी धार्मिक पर्यटकों का आने जाने का तांता लगा रहता हैं। यह मन्दिर पाली शहर के बीचों बीच होने के कारण देशी विदेशी पर्यटकों का मुख्य आकर्षण का केन्द्र है। इसके साथ गोडवाड़ के राता महावीर, मुछाला महावीर, फालना का स्वर्ण मन्दिर, मानपुरा भांकरी, लाखोटिया महादेव, नवलखा मन्दिर, करणी माता मन्दिर, बजरंग बाग, गणेश मन्दिर, ओम विश्व गुरूकुल दीप,शनिधाम आलावास सहित जहां के अनेक धार्मिक स्थान धार्मिक पर्यटन के केन्द्र है। निमाज का चामुण्डा माता मन्दिर पुरातात्विक महत्व का प्रमुख स्थल है। यहां की बारीक कारीगरी व दीवारों पर उत्कीर्ण मूर्तियां स्थापत्य कला की उत्कृष्टता की प्रतीक देखने को मिलती है। यहां पुरातात्विक धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के मन्दिर होने के कारण धार्मिक पर्यटन को फलीभूत करने में अहम् भूमिका निभा रहे है। जो पर्यटकों को अपनी और आकर्षित कर रहे है। धार्मिक पर्यटन के अनेक स्थान है जो पर्यटन के विकास में अपनी खास भूमिका एवं पहचान बनाये हुये है। यहां देशी विदेशी पर्यटक ज्यादातर इन धार्मिक पर्यटन स्थलों पर आते है जो यहां की विभिन्नता भरी संस्कृति को देखकर अभिभूत होते हैं। यहां ऐसा लगता है मानों गोडवाड़ धार्मिक पर्यटन का खजाना हो जो इस क्षेत्र के लिये अद्भूत सौगात हैं

Thursday, March 31, 2011

Saturday, March 20, 2010

गोडवाड महोत्सव 2010 श्री सोनाना खेतलाजी


























गोडवाड महोत्सव 2010 श्री सोनाना खेतलाजी

गोडवाड महोत्सव 2010 श्री सोनाना खेतलाजी













गोडवाड महोत्सव 2010 श्री सोनाना खेतलाजी

देसुरी उपखंड अधिकारी गोडवाड महोत्सव समिती के
अध्यक्ष श्री मोहनसिंह राजपुरोहित सफारी के
दौरान लोगो का अभिवादन करते हुए।



नवखंड श्री सोनाना खेतलाजी



भजन संध्या












रात्रि में प्रकाश से जगमग नवखंड


Friday, March 19, 2010

गोडवाड महोत्सव 2010 श्री सोनाना खेतलाजी

गोडवाड महोत्सव 2010 श्री सोनाना खेतलाजी










श्री सोनाना खेतलाजी











श्री सोनाना खेतलाजी



मुख्य द्वार श्री सोनाना खेतलाजी















गोडवाड महोत्सव २००९ श्री सोनाना खेतलाजी

गोडवाड महोत्सव २००९ श्री सोनाना खेतलाजी
साफा बंधन प्रतियोगिता



गैर दल विश्राम करते हुए



गोडवाड श्री प्रतियोगिता

घोडा दौड प्रतियोगिता देखते अधिकारी

घोडा दौड प्रतियोगिता




















गोडवाड महोत्सव २००९ श्री सोनाना खेतलाजी

गोडवाड महोत्सव २००९ श्री सोनाना खेतलाजी



मेले में मिठाई खरीदते लोग



बासुरीवाला




मुख्य द्वार श्री सोनाना खेतलाजी



श्री सोनाना खेतलाजी मेला